शिशु स्वास्थ्य जांच रिमाइंडर टूल | Infant Health Checkup Reminder Tool | NRDP Hub

शिशु स्वास्थ्य जांच रिमाइंडर टूल (Infant Health Checkup Reminder Tool)

यह उन्नत बाल स्वास्थ्य रिमाइंडर टूल भारत सरकार के **स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय** तथा **राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)** द्वारा संचालित **होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC)** और **होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (HBYC)** के आधिकारिक क्लिनिकल प्रोटोकॉल के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। नवजात शिशु के जन्म के पहले 42 दिन और प्रारंभिक 2 वर्ष जीवन के सबसे संवेदनशील चरण होते हैं, जहाँ निमोनिया, हाइपोथर्मिया (ठंडा पड़ना), पीलिया (Jaundice), कुपोषण और संक्रमण के कारण शिशु मृत्यु का खतरा सबसे अधिक होता है। राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत संस्थागत प्रसव (अस्पताल में जन्म) वाले शिशुओं के घर पर आशा (ASHA) कार्यकर्ता द्वारा 6 गृह भेंट (दिन 3, 7, 14, 21, 28, 42) तथा घर पर जन्मे शिशुओं हेतु 7 गृह भेंट (दिन 1, 3, 7, 14, 21, 28, 42) अनिवार्य हैं। इसके बाद HBYC के तहत माह 3, 6, 9, 12, 15 पर फॉलो-अप जांचें होती हैं। यह टूल बच्चे की आयु और लक्षणों के अनुसार आगामी जांच, खतरे के संकेतों (Danger Signs) और मुफ़्त स्वास्थ्य अधिकारों की लाइव रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

🎯 यह शिशु स्वास्थ्य जांच टूल क्या है, उपयोग कैसे करें व मुख्य लाभ?

  • यह टूल क्या है? यह नवजात व 2 वर्ष तक के शिशुओं की आयु, प्रसव स्थान (अस्पताल/घर), वजन व पोषण स्थिति का मूल्यांकन कर अगली आशा गृह भेंट तिथि, देय टीके और खतरे के लक्षणों का लाइव अलर्ट देने वाला रिमाइंडर इंजन है।
  • इसे कैसे उपयोग करें? नीचे दिए गए फॉर्म में शिशु/अभिभावक का नाम लिखें, अपना राज्य, जिला, शिशु की वर्तमान आयु, प्रसव का स्थान, और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति चुनकर सबमिट बटन दबाएं।
  • इससे क्या फायदा है? यह बच्चे के वजन घटने, सांस फूलने या सुस्त होने जैसे गंभीर खतरों की समय पर पहचान करता है, SNCU रेफरल का रास्ता दिखाता है, और प्राइवेट क्लीनिकों के अनावश्यक भारी खर्च से बचाता है।
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📢 लाइव अपडेट (वर्ष 2026): राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) व JSSK के तहत 1 वर्ष तक के सभी बीमार शिशुओं का सरकारी अस्पतालों और SNCU वार्डों में संपूर्ण इलाज, दवाएं, जांच और एम्बुलेंस 100% कैशलेस व निःशुल्क है।
⏳ आगामी अनिवार्य बाल स्वास्थ्य मूल्यांकन व पोषण जांच सत्र चक्र
--दिन
--घंटे
--मिनट
--सेकंड
आंगनवाड़ी व स्वास्थ्य उप-केंद्रों पर ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHND) सत्र प्रत्येक बुधवार या शुक्रवार को सुबह 09:00 AM से दोपहर 02:00 PM तक आयोजित होते हैं।
📋 शिशु विवरण व स्वास्थ्य रिमाइंडर क्रेडेंशियल दर्ज करें

📌 बाल सुरक्षा निर्देश: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार 1 वर्ष तक के प्रत्येक बीमार शिशु का संपूर्ण उपचार JSSK के तहत 100% मुफ़्त है। कोई भी गोपनीय व्यक्तिगत डेटा यहाँ संग्रहीत नहीं किया जाता।

🎯 शिशु स्वास्थ्य ऑडिट व जांच परिणाम (Infant Health Checkup Summary):

NHM HBNC/HBYC राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य रिपोर्ट

शिशु उपचार व जांच शुल्क
100% मुफ़्त (₹0)
(JSSK व RBSK के तहत मुफ़्त)
स्वास्थ्य स्थिति व तात्कालिकता
जाँच जारी...
(क्लिनिकल ट्राइएज स्तर)
आशा गृह भेंट (HBNC Visit) दिवस
जाँच जारी...
(अनिवार्य घरेलू जांच कैलेंडर)
📊 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य जांच व HBNC/HBYC गृह भेंट अनुसूची
शिशु आयु काल / माइलस्टोन अनिवार्य स्वास्थ्य जांच व हस्तक्षेप प्रदाता व विधिक अधिकार
जन्म से 42 दिन (HBNC नवजात काल) अस्पताल जन्म: 6 गृह भेंट (3, 7, 14, 21, 28, 42 दिन)
घर पर जन्म: 7 गृह भेंट (1, 3, 7, 14, 21, 28, 42 दिन)
आशा कार्यकर्ता द्वारा तापमान, वजन व स्तनपान जांच मुफ़्त
3, 6, 9, 12 एवं 15 माह (HBYC चरण) वजन-लंबाई ट्रैकिंग, पूरक ऊपरी आहार परामर्श, ओआरएस-जिंक वितरण आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा नियमित विकास निगरानी
खतरे के लक्षण व आपातकाल (Danger Signs) दूध न पीना, ठंडा पड़ना, सांस फूलना, पीलिया, ऐंठन या तेज बुखार 102 एम्बुलेंस से SNCU/अस्पताल में 100% मुफ़्त इलाज (JSSK)
RBSK 4Ds जन्मजात दोष स्क्रीनिंग दिल में छेद, कटे होंठ, मुड़े पैर, बहरापन, मोतियाबिंद की मुफ़्त सर्जरी जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) द्वारा कैशलेस सर्जरी
🔍 विधिक स्टेटस डिकोडिंग एवं तात्कालिक सुधारात्मक समाधान:

🌐 त्वरित Action डायरेक्ट आधिकारिक स्वास्थ्य लिंक्स
🚀 नवजात व शिशु की सुरक्षित स्वास्थ्य देखभाल के 4 विधिक चरण
📌 1. जन्म के तुरंत बाद पहले 42 दिनों में आशा (ASHA) कार्यकर्ता की गृह भेंट सुनिश्चित कराएं

माध्यम: 👩‍⚕️ आशा कार्यकर्ता (HBNC किट द्वारा घर पर जांच)
आशा दीदी डिजिटल थर्मामीटर से बच्चे का तापमान नापेंगी, वजन करेंगी, नाभि की जांच करेंगी और मां को सही तरीके से स्तनपान (Latch-on) कराना सिखाएंगी। इसके लिए उन्हें कोई पैसा न दें, सरकार उन्हें प्रोत्साहन राशि देती है।

📌 2. पहले 6 महीने तक केवल और केवल मां का दूध पिलाएं; घुट्टी, शहद या पानी बिल्कुल न दें

माध्यम: 🤱 संपूर्ण स्तनपान (Exclusive Breastfeeding)
जन्म के पहले घंटे में मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (Colostrum) बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका है। 6 माह तक ऊपर से पानी भी न दें, अन्यथा बच्चे को दस्त और जानलेवा निमोनिया का खतरा होता है।

📌 3. किसी भी खतरे का लक्षण (दूध न पीना, ठंडा पड़ना, सांस फूलना) दिखते ही तुरंत 102 मिलाएं

माध्यम: 🚑 24x7 मुफ़्त एम्बुलेंस सेवा (102 / 108)
नवजात शिशु की बीमारी बहुत तेजी से बिगड़ती है। घरेलू उपचार में समय नष्ट न करें; तुरंत 102 पर फोन करें और बच्चे को सरकारी अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) ले जाएं।

📌 4. 6 माह पूरे होने पर गाढ़ा ऊपरी पूरक आहार प्रारंभ करें और HBYC जांच जारी रखें

माध्यम: 🥣 पूरक आहार (Complementary Feeding) + VHND सत्र
180 दिन पूरे होने पर मां के दूध के साथ मसली हुई दाल, खिचड़ी, दलिया, केला शुरू करें। हर महीने आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चे का वजन और लंबाई (Growth Monitoring Chart) दर्ज करवाएं।

📋 शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के 3 प्रमुख आधिकारिक चैनल
👩‍⚕️ आशा HBNC गृह भेंट
🏥 SNCU / NBSU केंद्र
📱 104 / 102 हेल्पलाइन
1
जन्म के 24 घंटे में आशा दीदी को सूचित करें

माध्यम: 👩‍⚕️ गाँव/वार्ड की स्थानीय आशा कार्यकर्ता
अस्पताल से छुट्टी मिलते ही आशा दीदी को बताएं ताकि वे घर आकर पहले सप्ताह की अनिवार्य जांचें शुरू कर सकें।

2
वजन चार्ट व तापमान रीडिंग नोट करवाएं

माध्यम: 👩‍⚕️ गाँव/वार्ड की स्थानीय आशा कार्यकर्ता
आशा दीदी स्प्रिंग बैलेंस से बच्चे का वजन लेंगी और एमसीपी (MCP) कार्ड में प्रविष्टि दर्ज करेंगी।

3
कंगारू मदर केयर (KMC) तकनीक सीखें

माध्यम: 👩‍⚕️ गाँव/वार्ड की स्थानीय आशा कार्यकर्ता
कम वजन वाले शिशुओं को मां या पिता के सीने से चिपकाकर त्वचा-से-त्वचा संपर्क (KMC) देकर गर्म रखने का तरीका सीखें।

1
जिला अस्पताल SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) जाएं

माध्यम: 🏥 सरकारी नवजात गहन चिकित्सा इकाई
गंभीर बीमार, समय से पहले जन्मे (Premature) या 1.8 किलो से कम वजन वाले शिशुओं को सीधे SNCU में भर्ती कराएं।

2
100% मुफ़्त वॉर्मर, फोटोथेरेपी व दवाएं पाएं

माध्यम: 🏥 सरकारी नवजात गहन चिकित्सा इकाई
JSSK के तहत पीलिया के लिए फोटोथेरेपी, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और सभी एंटीबायोटिक्स पूर्णतः मुफ़्त मिलती हैं।

3
डिस्चार्ज के बाद नियमित फॉलो-अप क्लीनिक आएं

माध्यम: 🏥 सरकारी नवजात गहन चिकित्सा इकाई
अस्पताल से छुट्टी के बाद 1 वर्ष तक हर 3 महीने पर बाल रोग विशेषज्ञ से विकास और आंखों की जांच करवाएं।

1
102 मुफ़्त जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस कॉल करें

माध्यम: 📱 24x7 टोल-फ्री आपातकालीन सेवा
बीमार शिशु को अस्पताल ले जाने हेतु तुरंत 102 मिलाएं। गाड़ी बिना ₹1 लिए घर आकर बच्चे को अस्पताल पहुंचाएगी।

2
104 राष्ट्रीय स्वास्थ्य परामर्श हेल्पलाइन

माध्यम: 📱 24x7 टोल-फ्री आपातकालीन सेवा
यदि रात में बच्चा दूध न पिए या लगातार रोए, तो 104 पर फोन करके ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से फोन पर आपातकालीन सलाह लें।

3
ई-संजीवनी पर पीडियाट्रिक स्पेशलिस्ट दिखाएं

माध्यम: 📱 24x7 टोल-फ्री आपातकालीन सेवा
सामान्य सर्दी, खांसी या दाने के लिए मोबाइल से ई-संजीवनी ऐप पर बाल रोग विशेषज्ञ से मुफ़्त वीडियो कॉल करें।

✅ कौन शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का पात्र है और कौन से अधिकार प्राप्त हैं ❌
(Universal Child Health Rights & JSSK/RBSK Coverage)

✅ कौन से बच्चे 100% मुफ़्त स्वास्थ्य सेवाओं के विधिक पात्र हैं
  • देश का प्रत्येक नवजात व 1 वर्ष तक का बीमार शिशु (JSSK शून्य खर्च गारंटी)
  • 0 से 18 वर्ष तक के बच्चे जिनके जन्मजात दोष हैं (RBSK मुफ़्त सर्जरी अधिकार)
  • कम वजन (LBW) व समय से पूर्व जन्मे बच्चे (SNCU में मुफ़्त आईसीयू सेवा)
  • अमीर या गरीब—किसी भी बीपीएल कार्ड या आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है
❌ क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए व वर्जित बातें (What to Avoid)
  • 6 माह से पहले घुट्टी, शहद, गाय का दूध, ग्राइप वाटर या पानी देना सख्त वर्जित है
  • खतरे के लक्षण दिखने पर झाड़-फूंक या नीम-हकीम (झोलाछाप) के पास समय नष्ट करना
  • बच्चे को नहलाकर या गीले कपड़ों में रखकर ठंडा होने देना (हाइपोथर्मिया का खतरा)
  • सरकारी अस्पताल में SNCU या लेबर रूम में किसी भी कर्मचारी को बधाई या दवा के पैसे देना

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) - शिशु स्वास्थ्य जांच व HBNC/HBYC विशेष

01. होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) क्या है और आशा कार्यकर्ता कितनी बार घर आती है? +
होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसके तहत जन्म के पहले 42 दिनों में आशा कार्यकर्ता घर आकर नवजात शिशु की जांच करती है। यदि बच्चे का जन्म सरकारी/निजी अस्पताल में हुआ है, तो आशा कुल **6 गृह भेंट** (दिन 3, 7, 14, 21, 28 और 42) करती है। यदि प्रसव घर पर हुआ है, तो आशा कुल **7 गृह भेंट** (दिन 1, 3, 7, 14, 21, 28 और 42) करती है। यह जांच 100% मुफ़्त होती है।
02. नवजात शिशु में 'खतरे के लक्षण' (Danger Signs) कौन-से हैं जिन्हें देखते ही तुरंत अस्पताल भागना चाहिए? +
नवजात शिशु में निम्नलिखित 6 लक्षण गंभीर खतरे के संकेत हैं: 1. बच्चा मां का दूध बिल्कुल न पी पा रहा हो या निगल न सके, 2. शरीर छूने पर अत्यधिक ठंडा पड़ जाए या तेज बुखार हो, 3. तेज सांस चलना (60 से अधिक प्रति मिनट) या सीने की पसलियां अंदर धंसना, 4. हाथ की हथेलियां और पैर के तलवे गहरे पीले पड़ना (Severe Jaundice), 5. बच्चा सुस्त, बेहोश या हाथ-पैर हिलाना बंद कर दे या दौरे (Convulsions) पड़ें, और 6. नाभि से मवाद बहना या लाल सूजन होना। ऐसा दिखने पर तुरंत 102 एम्बुलेंस बुलाएं।
03. स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) क्या है और क्या इसमें इलाज का कोई पैसा लगता है? +
SNCU (Special Newborn Care Unit) प्रत्येक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में स्थित एक विशेष नवजात गहन चिकित्सा इकाई (ICU) है। इसमें समय से पूर्व जन्मे (Preterm), कम वजन वाले (1.8 किलो से कम) या गंभीर रूप से बीमार नवजातों को रखा जाता है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के तहत SNCU में बच्चे का इलाज, वॉर्मर, फोटोथेरेपी, ऑक्सीजन, दवाएं और जांच **100% मुफ़्त (Zero Cost)** होती हैं।
04. जन्म के समय नवजात शिशु का सामान्य वजन कितना होना चाहिए और कम वजन होने पर क्या करें? +
जन्म के समय स्वस्थ शिशु का सामान्य वजन **2.5 किलोग्राम (2,500 ग्राम) से 3.5 किलोग्राम** के बीच होना चाहिए। यदि वजन 2.5 किलो से कम है, तो उसे 'लो बर्थ वेट (LBW)' कहा जाता है। ऐसे बच्चों को ठंड से बचाने के लिए मां या पिता द्वारा **'कंगारू मदर केयर' (KMC)** दी जानी चाहिए, जिसमें बच्चे को केवल लंगोट पहनाकर माता-पिता के सीने पर त्वचा-से-त्वचा सटाकर कपड़े में लपेटा जाता है। साथ ही हर 2 घंटे में मां का दूध पिलाना आवश्यक है।
05. क्या जन्म के पहले 6 महीनों में बच्चे को पानी, घुट्टी या शहद चटाना चाहिए? +
बिल्कुल नहीं! वैज्ञानिक और चिकित्सीय रूप से यह बच्चे की जान के लिए खतरनाक है। 6 माह तक बच्चे को केवल और केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए (Exclusive Breastfeeding)। मां के दूध में 80% से अधिक पानी होता है, इसलिए भीषण गर्मी में भी पानी देने की जरूरत नहीं होती। शहद चटाने से 'इन्फेंट बोटुलिज़्म' (घातक जीवाणु संक्रमण) हो सकता है और घुट्टी से आंतों का गंभीर संक्रमण और दस्त हो जाता है।
06. होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (HBYC) क्या है और इसमें कब-कब जांच होती है? +
HBYC कार्यक्रम HBNC का अगला चरण है जो बच्चे के 42 दिन से लेकर 15 माह की आयु तक चलता है। इसके तहत आशा कार्यकर्ता बच्चे के **3 माह, 6 माह, 9 माह, 12 माह और 15 माह** पूरे होने पर कुल 5 अतिरिक्त गृह भेंट करती है। इस दौरान बच्चे की लंबाई, वजन, पूरक ऊपरी आहार की शुरुआत, ओआरएस-जिंक का उपयोग और उम्र अनुसार सीखने-समझने के मील के पत्थरों (Developmental Milestones) की जांच की जाती है।
07. यदि नवजात शिशु की त्वचा या आंखें पीली दिखें (Jaundice / पीलिया), तो क्या धूप में रखना काफी है? +
जन्म के 2-3 दिन बाद हल्का पीलिया सामान्य (Physiological) हो सकता है जो पर्याप्त दूध पीने से स्वतः ठीक हो जाता है। परंतु यदि पीलिया जन्म के पहले 24 घंटे में दिखे, या पीलापन छाती, पेट, हथेलियों और पैरों के तलवों तक फैल जाए, तो यह गंभीर 'पैथोलॉजिकल जॉन्डिस' है। साधारण धूप से यह ठीक नहीं होता; यदि बिलीरुबिन का स्तर बहुत बढ़ जाए तो बच्चे के दिमाग को स्थायी नुकसान (Kernicterus) हो सकता है। ऐसे में तुरंत अस्पताल के SNCU जाकर 'फोटोथेरेपी' मशीन में मुफ़्त इलाज कराएं।
08. शिशु को पूरक ऊपरी आहार (Semi-solid Food) किस उम्र में और कैसे शुरू करना चाहिए? +
जैसे ही बच्चा पूरे 6 महीने (180 दिन) का हो जाए, तुरंत पूरक आहार शुरू करना चाहिए। 6 माह से पहले शुरू करना या 6 माह के बाद देर करना दोनों कुपोषण का कारण बनते हैं। शुरुआत में मां के दूध के साथ दिन में 2-3 बार गाढ़ा, मसला हुआ ताजा भोजन दें—जैसे दाल-चावल की खिचड़ी (घी डालकर), मसला हुआ केला, दलिया या सूजी की खीर। कटोरी-चम्मच से खिलाएं, कभी भी बोतल से न पिलाएं।
09. क्या जन्मजात विकारों (जैसे दिल में छेद, कटे होंठ, मुड़े पैर) का इलाज भी सरकार कराती है? +
हाँ, 100% मुफ़्त कराती है! राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत मोबाइल हेल्थ टीमें आंगनवाड़ी और स्कूलों में बच्चों की जांच करती हैं। यदि बच्चे में 4Ds (Defects at birth, Deficiencies, Diseases, Development delays) का कोई भी लक्षण पाया जाता है, तो जिला अस्पताल के DEIC केंद्र के माध्यम से बड़े मेडिकल कॉलेजों और एम्स में सर्जरी व थेरेपी पूरी तरह कैशलेस व निःशुल्क कराई जाती है।
10. यदि आशा कार्यकर्ता घर पर जांच करने न आए या अस्पताल में बीमार शिशु के इलाज के पैसे मांगे जाएं तो कहाँ शिकायत करें? +
यदि आशा गृह भेंट न करे, तो अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर (BCM) या एएनएम से शिकायत करें। यदि सरकारी अस्पताल में बीमार नवजात के इलाज के पैसे मांगे जाएं, तो तुरंत अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक या जिला **मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)** से शिकायत करें। इसके अलावा राष्ट्रीय हेल्पलाइन **104** पर कॉल करें अथवा **pgportal.gov.in** पर सीधे स्वास्थ्य मंत्रालय को ऑनलाइन शिकायत भेजें।

📢 बाल स्वास्थ्य व आपातकालीन शिशु सुरक्षा हेल्पलाइन संपर्क

• मुफ़्त 24x7 बीमार शिशु एम्बुलेंस सेवा: 102 / 108 (टोल-फ्री कॉल)
• राष्ट्रीय स्वास्थ्य हेल्पलाइन (MoHFW): 104 / 1800-180-1104
• राष्ट्रीय बाल अधिकार व आपातकालीन हेल्पलाइन (CHILDLINE): 1098
• आधिकारिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पोर्टल: nhm.gov.in (HBNC / HBYC बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम)
• केंद्रीय लोक शिकायत निवारण पोर्टल: pgportal.gov.in (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नोड)
नोट: यह प्लेटफार्म (NRDP) एक स्वतंत्र नागरिक समावेशन सूचना पोर्टल है। यह टूल केवल सामान्य मार्गदर्शक बाल स्वास्थ्य विश्लेषण, HBNC/HBYC प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के आधिकारिक दिशा-निर्देशों की जानकारी प्रदान करता है। नवजात शिशु में कोई भी खतरे का लक्षण (जैसे सांस फूलना, शरीर ठंडा पड़ना, दूध न पीना या पीलिया) दिखने पर घरेलू उपचार में समय नष्ट न करें; तुरंत 102 एम्बुलेंस बुलाकर नजदीकी सरकारी अस्पताल के आपातकालीन बाल रोग कक्ष या SNCU में व्यक्तिगत रूप से जाएं।
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