पीएम-प्रणाम वैकल्पिक उर्वरक राज्य सब्सिडी ट्रैकर | NRDP Hub

पीएम-प्रणाम वैकल्पिक उर्वरक राज्य सब्सिडी ट्रैकर (PM-PRANAM State Subsidy Tracker)

रासायनिक उर्वरकों (यूरिया व डीएपी) पर देश की अत्यधिक बजटीय निर्भरता को कम करने और धरती माता के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु केंद्र सरकार द्वारा **पीएम-प्रणाम योजना (PM-PRANAM 2026)** शुरू की गई है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों द्वारा रासायनिक उर्वरकों की खपत में की गई कुल सब्सिडी बचत का **50% हिस्सा वित्तीय अनुदान (Grant)** के रूप में राज्यों को वापस प्रदान करती है। इस केंद्रीय अनुदान का 70% हिस्सा गांवों में वैकल्पिक उर्वरक (नैनो यूरिया, वर्मीकंपोस्ट, बायो-फर्टिलाइजर) उत्पादन परिसंपत्तियों के निर्माण और किसानों को प्रत्यक्ष प्रोत्साहन देने हेतु उपयोग किया जाता है। इस उन्नत 9-डेटा इनपुट कस्टमाइज्ड सिम्युलेटर द्वारा अपनी रासायनिक खाद बचत, राज्य स्तरीय वित्तीय अनुदान और कृषक प्रोत्साहन लाभ का लाइव विश्लेषण करें।

🎯 इस पीएम-प्रणाम सब्सिडी ट्रैकर की मुख्य विशेषताएं:

  • 9-डेटा कस्टमाइज्ड विधिक ऑडिट: यह सिम्युलेटर आपके राज्य, जिले, रासायनिक खाद कटौती लक्ष्य, वैकल्पिक उर्वरक चयन, जोत रकबा और आधार-केसीसी सिंकिंग जैसे 9 पैमानों को प्रोसेस करके प्रामाणिक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • 50% राज्य बजटीय अनुदान गणना: रासायनिक यूरिया व डीएपी की कम खपत से होने वाली केंद्रीय सब्सिडी बचत में से राज्य सरकार को मिलने वाले 50% शेयर का वैज्ञानिक आकलन करता है।
  • कृषक प्रोत्साहन एवं वैकल्पिक खाद छूट: नैनो यूरिया या वर्मीकंपोस्ट अपनाने पर प्रति हेक्टेयर मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन व रियायत की सटीक गणना करता है।
👁️ 0
📢 केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय लाइव अपडेट (वर्ष 2026): पीएम-प्रणाम योजना के तहत जो राज्य पिछले 3 वर्षों की औसत खपत की तुलना में रासायनिक खाद उपयोग में 10% या उससे अधिक कटौती करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन फंड प्राथमिकता नोड के तहत तुरंत विमुक्त किया जाएगा।
⏳ चालू वित्तीय वर्ष सब्सिडी बचत एवं राज्य अनुदान क्लेम विंडो
--दिन
--घंटे
--मिनट
--सेकंड
राज्य कृषि विभागों द्वारा उर्वरक खपत ब्यौरा सिंक करने और केंद्रीय ट्रेजरी से पीएम-प्रणाम इंसेंटिव फंड क्लेम करने की लाइव आवर्ती समय-सीमा।
📋 अपनी कृषि प्रोफ़ाइल एवं उर्वरक बचत लक्ष्य दर्ज करें
🚀 पीएम-प्रणाम योजना के तहत वैकल्पिक खाद अपनाकर प्रोत्साहन राशि पाने का 5-स्टेप रोडमैप
📌 1. सॉयल हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार रासायनिक यूरिया/डीएपी खपत की गणना

अपने सॉयल कार्ड के आधार पर पिछले वर्ष उपयोग की गई रासायनिक बोरियों में से न्यूनतम 10% से 25% कटौती का मौसमी लक्ष्य निर्धारित करें।

📌 2. अधिकृत बिक्री केंद्र (PACS / Dealer) से नैनो यूरिया या बायो-फर्टिलाइजर का क्रय

iFMS आधार लिंक्ड पीओएस (POS) मशीन पर बायोमेट्रिक अंगूठा लगाकर रियायती दर पर नैनो यूरिया बोतल या जैविक खाद की खरीद दर्ज कराएं।

📌 3. गांव व ब्लॉक स्तर पर रासायनिक बचत आंकड़ों का डिजिटल लेजर सिंकिंग

जिला कृषि अधिकारी (DAO) द्वारा आपके ब्लॉक क्षेत्र की कुल रासायनिक खाद बचत और वैकल्पिक खाद अपनाने के आंकड़ों को केंद्रीय सर्वर पर अपडेट किया जाएगा।

📌 4. राज्य सरकार को 50% केंद्रीय सब्सिडी अनुदान (Grant) का हस्तांतरण

केंद्र सरकार सब्सिडी में हुई कुल बचत का 50% हिस्सा सीधे राज्य सरकार के खाते में हस्तांतरित करेगी, जिसका 70% हिस्सा ग्रामीण परिसंपत्तियों व प्रोत्साहन हेतु लॉक होगा।

📌 5. पंचायत / FPO माध्यम से किसान के खाते में डीबीटी प्रोत्साहन का संवितरण

आधार सीडेड बैंक खातों में वैकल्पिक उर्वरक उपयोग प्रोत्साहन राशि, ड्रोन स्प्रे सब्सिडी या जैविक पिट ग्रांट के रूप में डायरेक्ट ट्रांसफर किया जाएगा।

📋 वैकल्पिक उर्वरक अपनाने और मिट्टी सुधार के 3 विधिक तरीके
🧪 नैनो यूरिया व नैनो डीएपी तकनीक (Nano Liquid Route)
🌱 वर्मीकंपोस्ट एवं केंचुआ खाद (Organic Compost)
🦠 जैव-उर्वरक एवं जीवाणु कल्चर (Bio-Fertilizer Node)
1
1 बोतल नैनो यूरिया = 1 बोरी यूरिया

500 ml नैनो यूरिया की एक बोतल पारंपरिक 45 kg यूरिया बोरी के बराबर प्रभाव देती है, जिससे परिवहन व भंडारण लागत शून्य हो जाती है।

2
फसल की पत्तियों पर छिड़काव (Foliar Spray)

कले निकलने और फूल आने से पूर्व 2 से 4 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करें। 80% से अधिक नाइट्रोजन पौधों द्वारा सोख ली जाती है।

3
ड्रोन छिड़काव सब्सिडी प्रोत्साहन

राज्य कृषि विभाग द्वारा नैनो स्प्रे हेतु किसान ड्रोन बुकिंग पर प्रति एकड़ विशेष किराए की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

1
ऑन-फार्म वर्मीकंपोस्ट पिट निर्माण

अपने खेत में एचडीपीई (HDPE) वर्मी बेड स्थापित कर गोबर व फसल अवशेषों से उच्च गुणवत्ता वाली केंचुआ खाद बनाएं।

2
50% से 75% सरकारी वर्मी पिट ग्रांट

PKVY और NMSA योजनाओं के तहत वर्मी बेड स्थापना हेतु ₹8,000 से ₹20,000 तक की डायरेक्ट सब्सिडी प्राप्त करें।

3
मिट्टी के जीवांश कार्बन (OC) में वृद्धि

जैविक कार्बन 0.75% से ऊपर पहुंचने पर रासायनिक खादों की आवश्यकता 30% तक स्वतः कम हो जाती है।

1
बीज उपचार (Seed Treatment) प्रचालन

बुवाई से पूर्व बीज को राइजोबियम या एजोटोबैक्टर कल्चर से उपचारित करें ताकि प्राकृतिक नाइट्रोजन फिक्सेशन हो सके।

2
फास्फोरस सोलुबिलाइजिंग बैक्टीरिया (PSB)

मिट्टी में फंसे हुए अघुलनशील फास्फोरस को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुंचाने हेतु PSB कल्चर का प्रयोग करें।

3
कम लागत में 20% तक डीएपी बचत

जैव-उर्वरकों के नियमित उपयोग से प्रति एकड़ 1 से 2 बोरी डीएपी की बचत सीधे संभव होती है।

✅ पीएम-प्रणाम प्रोत्साहन की विधिक शर्तें और ❌ अनुदान अवरुद्ध होने के प्रशासनिक कारण

✅ प्रोत्साहन राशि स्वीकृत होने की विधिक शर्तें
  • पिछले 3 वर्षों की औसत खपत की तुलना में चालू सत्र में रासायनिक उर्वरकों में न्यूनतम **10% की कटौती** प्रमाणित हो।
  • आवेदक का बैंक खाता आधार से **100% सीडेड (Aadhaar DBT Enabled)** और KCC लेजर से जुड़ा हो।
  • रासायनिक यूरिया की जगह नैनो यूरिया या बायो-फर्टिलाइज़र की अधिकृत पीओएस (POS) खरीद रसीद उपलब्ध हो।
❌ अनुदान होल्ड/रिजेक्ट होने के मुख्य कारण
  • No Reduction Discrepancy: पिछले वर्ष की तुलना में रासायनिक यूरिया या डीएपी की खपत में कोई कमी न होना या उल्टे खपत बढ़ जाना।
  • Aadhaar Mismatch Error: बैंक पासबुक और आधार कार्ड के नाम/अक्षरों में लिपिकीय अंतर होने से DBT प्रेषण ब्लॉक हो जाना।
  • Unregistered Vendor Purchase: खुले बाजार से बिना पीओएस रसीद के अनधिकृत विक्रेताओं से अमानक उत्पाद क्रय करना।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) - पीएम-प्रणाम योजना विशेष

01. पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? +
पीएम-प्रणाम योजना का मुख्य उद्देश्य देश में रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी) के असंतुलित उपयोग को कम करना, वैकल्पिक खादों (जैसे नैनो यूरिया, जैविक खाद) को बढ़ावा देना और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बचाना है। इसके लिए सरकार राज्यों को सब्सिडी बचत का 50% हिस्सा वित्तीय अनुदान के रूप में देती है।
02. रासायनिक खाद की बचत करने पर राज्य सरकार को कितना केंद्रीय अनुदान (Grant) मिलता है? +
योजना के विधिक प्रावधानों के अनुसार, पिछले 3 वर्षों की औसत खपत की तुलना में राज्य द्वारा बचाई गई कुल उर्वरक सब्सिडी राशि का **50% हिस्सा (50% Grant Share)** सीधे राज्य सरकार को केंद्रीय कोष से वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में प्रदान किया जाता है।
03. राज्यों को मिलने वाले इस 50% अनुदान का उपयोग कहाँ किया जाता है? +
राज्य को प्राप्त कुल अनुदान राशि का **70% हिस्सा** गांव, ब्लॉक व जिला स्तर पर वैकल्पिक उर्वरक उत्पादन इकाइयों, केंचुआ खाद शेड, नैनो स्प्रे ड्रोन और परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु खर्च होता है। शेष **30% हिस्सा** खाद कटौती करने वाले किसानों, पंचायतों और FPOs को नकद/डीबीटी प्रोत्साहन देने में उपयोग होता है।
04. क्या नैनो यूरिया (Nano Urea) का उपयोग करने से पीएम-प्रणाम के तहत लाभ मिलता है? +
हाँ, बिल्कुल। नैनो यूरिया की 1 बोतल (500 ml) पारंपरिक यूरिया की 1 बोरी (45 kg) को रिप्लेस करती है। जैसे ही आप पारंपरिक यूरिया की जगह नैनो यूरिया खरीदते हैं, पीओएस मशीन पर 1 बोरी यूरिया की सरकारी बचत दर्ज हो जाती है, जो पीएम-प्रणाम इंसेंटिव मैट्रिक्स में सिंक होती है।
05. व्यक्तिगत किसान को पीएम-प्रणाम योजना का सीधा वित्तीय लाभ कैसे प्राप्त होगा? +
जो किसान अपने सॉयल हेल्थ कार्ड की सिफारिश के अनुसार रासायनिक यूरिया में कटौती कर नैनो यूरिया या वर्मीकंपोस्ट अपनाते हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा चिन्हित डीबीटी इंसेंटिव स्कीमों, नैनो स्प्रे ड्रोन किराए में छूट, वर्मी बेड अनुदान और पंचायत स्तरीय कृषक पुरस्कारों के जरिए सीधा वित्तीय लाभ हस्तांतरित किया जाता है।
06. क्या पीएम-प्रणाम योजना में आवेदन करने के लिए अलग से कोई सरकारी पोर्टल या फीस है? +
नहीं, किसानों को पीएम-प्रणाम हेतु कोई अलग पंजीयन शुल्क या नया आवेदन नहीं करना पड़ता। जब आप अधिकृत केंद्र (PACS/डीलर) से पीओएस (POS) मशीन पर आधार लगाकर नैनो यूरिया या वैकल्पिक खाद खरीदते हैं, तो आपका बचत डेटा स्वतः iFMS पोर्टल पर पंजीकृत हो जाता है। यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क है।
07. एक बोरी यूरिया पर भारत सरकार औसतन कितनी सब्सिडी वहन करती है? +
अंतर्राष्ट्रीय बाजार दरों के अनुसार यूरिया की 45 kg बोरी का वास्तविक उत्पादन/आयात लागत लगभग ₹2,000 से ₹2,500 होता है। सरकार प्रति बोरी लगभग ₹1,800 से ₹2,200 की भारी सब्सिडी देती है, जिससे किसान को यह बोरी मात्र ₹266.50 में मिलती है। 1 बोरी की बचत से सरकार के ₹2,000 बचते हैं।
08. यदि मेरे बैंक खाते में आधार डीबीटी (Aadhaar Seeded DBT) चालू नहीं है तो क्या प्रोत्साहन मिलेगा? +
नहीं, केंद्र व राज्य सरकार के नियमों के तहत सभी प्रकार के कृषि प्रोत्साहन एवं सब्सिडी का भुगतान केवल आधार सीडेड बैंक खातों में 'Direct Benefit Transfer (DBT)' के जरिए ही किया जाता है। खाता अन-सीडेड होने पर फंड ट्रांजैक्शन फ़ेल हो जाएगा। तुरंत अपनी बैंक शाखा जाकर NPCI Aadhar Seeding फॉर्म जमा करें।
09. क्या ग्राम पंचायतें और FPOs भी पीएम-प्रणाम अनुदान का हिस्सा बन सकते हैं? +
हाँ, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को पीएम-प्रणाम के तहत विशेष अधिकार दिए गए हैं। अपने गांव/क्षेत्र में रासायनिक खाद में सबसे अधिक कटौती कराने वाली पंचायतों व FPOs को राज्य सरकार द्वारा सामूहिक बायो-फर्टिलाइजर प्लांट या कंपोस्टिंग यूनिट्स लगाने हेतु लाखों रुपये का विशेष अनुदान दिया जाता है।
10. नैनो यूरिया या वैकल्पिक उर्वरक उपलब्ध न होने पर शिकायत कहाँ दर्ज कराएं? +
यदि आपकी स्थानीय समिति या अधिकृत डीलर काउंटर पर नैनो यूरिया/वैकल्पिक खाद देने में मनाही की जाती है, अथवा रासायनिक यूरिया के साथ जबरन कोई अनचाहा उत्पाद बांधकर (Tying) बेचा जाता है, तो आप तुरंत रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के टोल-फ्री हेल्पलाइन **1800-115-501** अथवा CPGRAMS पोर्टल (pgportal.gov.in) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

📢 उर्वरक उपलब्धता विसंगति अथवा प्रशासनिक लापरवाही की विधिक शिकायत हेतु संपर्क नोड्स

• केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय हेल्पलाइन नंबर (Toll-Free): 1800-115-501 (iFMS पीओएस प्रविष्टि व नैनो खाद सहायता हेतु)
• केन्द्रीय लोक शिकायत निवारण पटल (CPGRAMS सर्वोच्च प्रशासनिक डेस्क): pgportal.gov.in (यहाँ सीधे ऑनलाइन विधिक केस दर्ज करें)
• विधिक निर्देश विनिर्देश: कतिपय अनधिकृत तत्व सोशल मीडिया पर 'पीएम-प्रणाम योजना के तहत घर बैठे नकद सब्सिडी आवंटन' का फर्जी दावा कर किसानों से रजिस्ट्रेशन फीस मांगते हैं। विधिक सुरक्षा मानकों के अनुसार, पीएम-प्रणाम योजना पूर्णतः सरकारी बजटीय समावेशन के अंतर्गत संचालित है; किसी भी प्राइवेट व्यक्ति या अनधिकृत लिंक पर कोई भी अग्रिम राशि स्थानांतरित न करें और केवल आधिकारिक `.gov.in` सरकारी डोमेन का ही उपयोग करें।
नोट: यह प्लेटफार्म (NRDP) एक स्वतंत्र नागरिक समावेशन सूचना पोर्टल है। यह टूल उपयोगकर्ता द्वारा चुनी गई रासायनिक खाद बचत प्रतिशत, वैकल्पिक उर्वरक प्रकार, जोत रकबा और खपत इनपुट्स के आधार पर केवल विधिक डिकोडिंग और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM 2026) सामान्य गाइडलाइंस के अनुसार अनुमानित सब्सिडी बचत, राज्य अनुदान शेयर और संभावित कृषक प्रोत्साहन का गणित प्रस्तुत करता है। वास्तविक लाइव सब्सिडी विमुक्तीकरण, राज्यवार बफर आवंटन, पीओएस मशीन वेरिफिकेशन और अंतिम प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण का विधिक निर्णय पूरी तरह से आपके राज्य के कृषि निदेशालय, जिला कृषि अधिकारी (DAO नोड) और केंद्रीय उर्वरक विभाग के अंतिम ट्रेजरी अप्रूवल निर्णय पर निर्भर करता है।
NRDP - National Resource & Data Portal
Logo